जीवन में मनुष्य के सामने
होते है सिर्फ दो रास्ते
या तो इस जीवन रूपी यज्ञ
का बन यजमान जाये
या फिर इसकी आहुति
अन्य कोई मार्ग है ही नहीं
मनुष्य की मुक्ति का
सत्य और धेय में हो इतनी
क्षमता की , जल की एक बूँद
से हो सके समुद्र का निर्माण
होते है सिर्फ दो रास्ते
या तो इस जीवन रूपी यज्ञ
का बन यजमान जाये
या फिर इसकी आहुति
अन्य कोई मार्ग है ही नहीं
मनुष्य की मुक्ति का
सत्य और धेय में हो इतनी
क्षमता की , जल की एक बूँद
से हो सके समुद्र का निर्माण
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