Monday, 7 January 2013

पतन निश्चित है समूल

पतन निश्चित है समूल , उस देश का
अगर नहीं किया अनुकरण , तुमने
अपनी संस्कृति औ' मूल्यों का
नहीं मिट सकता कोई भी देश
हो जब मूल्य संस्कृति औ' नारिया सुरक्षित
होती नहीं हानि दुर्जनों की दुर्जनता से
जितनी होती है सज्जनों की निश्क्रियिता से
लेकिन अपने अहंकार में जब कोई
करे माँ ममता मिट्टी का बलिदान
जब स्वार्थ और संकिर्टता
आता हो पहले राष्ट्र हितो से
करो सहस,जागो, कही देर न हो जाये
अक्शुय्य भारत कही फिर से
गुलाम ही न बन जाये
त्यागो अपना स्वार्थ , आओ आगे की
देश के गौरव से बड़ा कोई गौरव नहीं
आओ हम एकत्र हो करे
मिलकर सामना उनका

1 comment:

  1. सच है ...
    शुभकामनायें आपकी कलम को !
    पुनश्च: useless word verification should be remove immediately.

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