Wednesday, 26 December 2012

भूले-बिसरे  

1.
न ही तुमने जिकर किया
न ही हमने जिरह की
लाजिम है की हम अब देखेंगे 

2.
दुनिया की सारी जंगें
सब खुद के अंदर लड़ते हैं ।
बाहर तो बस
खून पसीने के किस्से
लिखते-पढ़ते-गढ़ते हैं ।

3.
तुम कहते हो की कुछ बात करो , बोलो तो
हज़ार बातें हैं , तुम सुन नहीं पाओगे
तुम कहते हो की गिले शिकवे , गिला करो
हज़ार शिकवे हैं तुम फिर न आओगे

4.  
तेरे होंठ बहुत खुश्क खुश्क रहते हैं
कभी तेरे लबो पे ताजी शायरी हुआ करती थी

ये तेरे होंठो पे तराने किसके हैं?
 

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